पुणे के 26 साल के बिज़नेसमैन केतन अग्रवाल की मौत को शुरू में ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था। हालांकि, पुलिस की जांच ने इस मामले को कथित हत्या में बदल दिया। पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर उसे लोनावला के लोहागढ़ किले से करीब 400 फीट गहरी खाई में धकेलने की साजिश रची। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच चल रही है और कोर्ट अंतिम फैसला सुनाएगी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा सवाल यही है: अगर शादी करने का इरादा नहीं था, तो रिश्ता खत्म क्यों नहीं किया गया? हत्या जैसा इतना बड़ा कदम क्यों उठाया गया? इस सवाल को समझने के लिए, आइए साइकोलॉजिस्ट और क्रिमिनोलॉजी के क्षेत्र में हुई रिसर्च पर नज़र डालते हैं। प्यार का जुनून और परिवार का दबाव अक्सर गलत फैसलों की वजह बन सकते हैं। साइकोलॉजिस्ट डॉ. बिंदा सिंह का कहना है कि ऐसे मामलों को सिर्फ़ अपराध के तौर पर नहीं देखा जा सकता; इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण भी हो सकते हैं। उनके मुताबिक, अगर किसी लड़की को परिवार में अपनी बात कहने की आज़ादी नहीं मिलती, उसकी भावनाओं को नहीं समझा जाता और अगर वह किसी दूसरे रिश्ते से भावनात्मक रूप से जुड़ गई है, तो लंबे समय तक उसके मन में घुटन और दबाव बना रह सकता है। डॉ. सिंह कहते हैं कि प्यार अक्सर धीरे-धीरे जुनून में बदल जाता है। ऐसी स्थितियों में, इंसान को लगता है कि उसके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: राजा और केतन ने असल में क्या अपराध किया था? सोनम केस के बाद सिया केस से छिड़ी बहस। वह यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया अक्सर लोगों को असल ज़िंदगी से दूर कर देती है। इंसान उस दुनिया में इतना खो जाता है कि वह हकीकत और कल्पना के बीच का फ़र्क साफ़-साफ़ नहीं देख पाता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गहन जांच के बिना आरोपी की मानसिक स्थिति के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।