हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र से नशे की लत की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने समाज और परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। छह दोस्तों के एक समूह में शामिल चार युवाओं की नशे की वजह से मौत हो गई, जबकि दो लोगों ने समय रहते इलाज और परिवार के सहयोग से इस बुरी आदत पर काबू पा लिया। यह घटना बताती है कि सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है। घुमारवीं का एक युवक बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लेकर बंगलूरू पढ़ने गया था। नए शहर, नए माहौल और दोस्तों के दबाव में उसने पहली बार नशा किया। शुरुआत में यह केवल एक प्रयोग की तरह लगा, लेकिन कुछ ही समय में यह उसकी आदत बन गया। धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई, मानसिक स्थिति और पारिवारिक रिश्तों पर इसका बुरा असर पड़ने लगा। घर से मिलने वाले पैसे नशे में खर्च होने लगे और उसका व्यवहार भी बदलने लगा। परिजनों ने समय रहते उसके स्वभाव में आए बदलावों को पहचान लिया और उसे वापस घर बुला लिया। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह, नियमित काउंसलिंग और परिवार के सहयोग से उसका उपचार शुरू हुआ। लंबे संघर्ष के बाद वह पूरी तरह से नशे की गिरफ्त से बाहर निकल आया और अब सामान्य जीवन जी रहा है। इस युवक ने बताया कि उसके छह दोस्तों का एक समूह था और सभी नशे के शिकार हो गए थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद सभी अपने घर लौट गए। इनमें से दो लोगों ने समय रहते इलाज शुरू कर दिया, लेकिन बाकी चार युवाओं ने उपचार नहीं कराया। कुछ वर्षों के भीतर चारों की अलग-अलग समय पर मौत हो गई। युवक का कहना है कि यदि समय पर इलाज कराया जाता तो शायद उनके दोस्त भी आज जीवित होते। घुमारवीं के ड्रग इंस्पेक्टर दिनेश गौतम ने बताया कि नशे पर रोक लगाने के लिए मेडिकल स्टोरों पर सिरिंज और अन्य दवाओं की बिक्री की नियमित निगरानी की जा रही है। हाल ही में घुमारवीं सिविल अस्पताल से दो लोगों द्वारा सिरिंज चोरी करने की घटना भी सामने आई थी, जिसके बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास भी जरूरी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर समय रहते ध्यान दें तो कई युवाओं को इस दलदल में फंसने से बचाया जा सकता है।