दुबई से कथित सट्टा कारोबार संचालित करने के आरोपी सतीश सनपाल को जबलपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने जबलपुर के चार थानों में दर्ज करीब आधा दर्जन एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। अलग-अलग मामलों में चार अन्य सह आरोपियों की याचिकाएं भी दायर की गई थीं। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि कथित अपराधों में छापेमारी वाली जगह पर आरोपी की शारीरिक मौजूदगी उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है। अदालत ने माना कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन ट्रायल कोर्ट में किया जाना चाहिए। सतीश सनपाल की ओर से दायर याचिकाओं में दावा किया गया था कि वह वर्ष 2020 से दुबई में रह रहा है और मार्च 2020 के बाद भारत नहीं आया। याचिका में यह भी कहा गया कि उसके खिलाफ सट्टेबाजी में सक्रिय भागीदारी, वित्तीय लेनदेन, बातचीत, चैट, ईमेल या कोई ठोस मनी ट्रेल सामने नहीं आया है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि सह आरोपी के मोबाइल की फोरेंसिक जांच में उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली और उसके बैंक खाते से भी कथित सट्टेबाजी से जुड़ा कोई लेनदेन नहीं हुआ। वहीं, अभियोजन पक्ष ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान सतीश सनपाल की कथित संलिप्तता दर्शाने वाली पर्याप्त सामग्री सामने आई है। चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है और उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट में जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य कथित सट्टेबाजी गतिविधियों में याचिकाकर्ता की भागीदारी की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने माना कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की वास्तविक जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए। इसलिए एफआईआर रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।