अंतरराष्ट्रीय
शेख हसीना का ऐलान: 'जेल हो या मौत, मैं बांग्लादेश लौटूंगी'; यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। इस दौरान उनके बेटे सजीब वाजेद और अवामी लीग के नेताओं ने यूनुस सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, कानून व्यवस्था की विफलता और हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उनका रिश्ता आज भी बांग्लादेश की जनता से अटूट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में बिताया है और भविष्य में भी वह अपने लोगों के लिए आवाज उठाती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे जेल हो या मौत, वह एक दिन बांग्लादेश जरूर लौटेंगी।
इस दौरान उनके बेटे सजीब वाजेद ने वर्ष 2024 के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 1,400 लोगों की मौत का दावा किया था, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 800 से कुछ अधिक बताई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र से अतिरिक्त 600 लोगों की सूची कई बार मांगी गई, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
सजीब वाजेद ने यूनुस सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने ऐसा कानून लागू किया है, जिसके तहत आंदोलन में शामिल लोगों को व्यापक कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। उनके अनुसार, इस कानून के कारण कई गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
वहीं, अवामी लीग के नेता मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल ने कहा कि सरकार बदलने के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सामाजिक तनाव बढ़ गया है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई और बेरोजगारी में वृद्धि हुई है तथा महिलाओं, पत्रकारों, वकीलों, कारोबारियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है।
अवामी लीग ने मांग की कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया जाए और सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से ही किया जाना चाहिए।
अपने संदेश में शेख हसीना ने कहा कि वह भले ही अपने देश से दूर हों, लेकिन बांग्लादेश की जनता हमेशा उनके दिल में रहेगी और वह उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।